वो तो ख़ुशबू है हवाओं में बिखर जायेगा
मसला फूल का है फूल किधर जायेगा
सोमवार, 6 अगस्त 2007
बुधवार, 1 अगस्त 2007
प्रतिस्पर्धा
कोई कुकहाते
लार टपकाते
सामने से चला आए
तो समझदार को चाहिए कि
वो डर जाए
और
इस आंशका से भर जाए
कि कहीं वो...उससे...
प्रतिस्पर्धा
ना कर जाए
-प्रमोद
लार टपकाते
सामने से चला आए
तो समझदार को चाहिए कि
वो डर जाए
और
इस आंशका से भर जाए
कि कहीं वो...उससे...
प्रतिस्पर्धा
ना कर जाए
-प्रमोद
चल अकेला.. चल अकेला, चल अकेला
चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला
तेरा मेला पीछे छूटा राही चल अकेला
हज़ारों मील लम्बे रास्ते तुझको बुलाते
यहाँ दुखड़े सहने के वास्ते तुझको बुलाते
है कौन सा वो इंसान यहाँ पे जिस ने दुख ना झेला
चल अकेला ...
तेरा कोई साथ न दे तो तू खुद से प्रीत जोड़ ले
बिछौना धरती को करके अरे आकाश ओढ़ ले
पूरा खेल अभी जीवन का तूने कहाँ है खेला
चल अकेला ...
तेरा मेला पीछे छूटा राही चल अकेला
हज़ारों मील लम्बे रास्ते तुझको बुलाते
यहाँ दुखड़े सहने के वास्ते तुझको बुलाते
है कौन सा वो इंसान यहाँ पे जिस ने दुख ना झेला
चल अकेला ...
तेरा कोई साथ न दे तो तू खुद से प्रीत जोड़ ले
बिछौना धरती को करके अरे आकाश ओढ़ ले
पूरा खेल अभी जीवन का तूने कहाँ है खेला
चल अकेला ...
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