फिलहाल
सोमवार, 6 अगस्त 2007
एक आवाज..
कोशिश भी कर, उम्मीद भी रख, रास्ता भी चुन
फिर उसके बाद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर
................
अपनी मर्जी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख हवाओं का जिधर है उधर के हम है...!
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