सोमवार, 6 अगस्त 2007

एक आवाज..

वो तो ख़ुशबू है हवाओं में बिखर जायेगा
मसला फूल का है फूल किधर जायेगा

एक आवाज..

कोशिश भी कर, उम्मीद भी रख, रास्ता भी चुन
फिर उसके बाद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर
................
अपनी मर्जी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं
रुख हवाओं का जिधर है उधर के हम है...!

एक आवाज..

दिल अभी अच्छी तरह टूटा नहीं
दोस्तों की मेहरबानी चाहिए...

बुधवार, 1 अगस्त 2007

प्रतिस्पर्धा

कोई कुकहाते
लार टपकाते
सामने से चला आए
तो समझदार को चाहिए कि
वो डर जाए
और
इस आंशका से भर जाए
कि कहीं वो...उससे...
प्रतिस्पर्धा
ना कर जाए
-प्रमोद

चल अकेला.. चल अकेला, चल अकेला

चल अकेला, चल अकेला, चल अकेला
तेरा मेला पीछे छूटा राही चल अकेला
हज़ारों मील लम्बे रास्ते तुझको बुलाते
यहाँ दुखड़े सहने के वास्ते तुझको बुलाते
है कौन सा वो इंसान यहाँ पे जिस ने दुख ना झेला
चल अकेला ...
तेरा कोई साथ न दे तो तू खुद से प्रीत जोड़ ले
बिछौना धरती को करके अरे आकाश ओढ़ ले
पूरा खेल अभी जीवन का तूने कहाँ है खेला
चल अकेला ...