फिलहाल
बुधवार, 1 अगस्त 2007
प्रतिस्पर्धा
कोई कुकहाते
लार टपकाते
सामने से चला आए
तो समझदार को चाहिए कि
वो डर जाए
और
इस आंशका से भर जाए
कि कहीं वो...उससे...
प्रतिस्पर्धा
ना कर जाए
-प्रमोद
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
नई पोस्ट
पुरानी पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
ब्लॉग आर्काइव
▼
2007
(5)
▼
अगस्त
(5)
एक आवाज..
एक आवाज..
एक आवाज..
प्रतिस्पर्धा
चल अकेला.. चल अकेला, चल अकेला
मेरे बारे में
Kanishk Chauhan
मेरा पूरा प्रोफ़ाइल देखें
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें